Hindi kavita on life , hindi kavita, hindi kavita on love, हिंदी कविता, हिंदी कविता संग्रह, हिंदी कवितायें, हिंदी कविता प्रकृति (इंसानी), ग़ज़ल, ग़ज़ल हिंदी, ग़ज़ल बेवफ़ाई, मजदूर शायरी, किसान शायरी मुफ़लिसी का दौर है(hindi kavita, gazal) वक़्त के धुँधले आसमां में गरमाईसों का दौर है छू के निकले उसकी गली को अजीब फ़रमाईसो का दौर हैं वो कहाँ, मैं कहाँ, पथ बिखरे बेजुबां आजमाइशों का दौर हैं चलो, अब चल दे यहाँ से बेबुनियादी समझाईसो का दौर हैं अच्छा हुआ तुम उधर चल दिए इधर तो सिफ़ारिशों का दौर हैं मुआफ़ी, ये सब दिमाग का शोर हैं दिल मे तो सरफ़रोशी का दौर हैं मुझे मेरे अंदर रखने की कोशिश बेटोक चापलुसी का दौर हैं इधर आवो तो आसमां भी ले आना जमीं पे मुफ़लिसी का दौर हैं थोड़ी बेबाकी हमको भी अता कर तुम्हारी ख़्वाईसो का दौर हैं रास्ते मंजिले तुमसे दूर 'सोम' पगडंडियों की बैशाखियों का दौर हैं अब ज्यादा क्या कहे 'सोम' दिलेबात दिल मे रखने का दौर हैं - सोमेन्द्र सिंह 'सोम' Hindi kavita on life, hindi kavita, hindi kavita on love, हिंदी कविता, हिंदी कविता संग्रह, हिंदी कवितायें, ...
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