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प्यार की प्यार से मुलाकात ( हिन्दी कविता)

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एक बात जो कह ना सके एक कहानी जो बन गयी कविता और कह रही है अनगिनत बाते उखड़ी हुई सांसे जमी उजास हुआ दिल मे आंखे धूप सी खिली मन हवा के  झोंके सा  गोधूलि में  खुश्बू बिखेरता  तेरे आँगन में ये खुश्बू है  तेरे जलाए खतों की  या तेरे गिरे आँसू में  धुली स्याही की बता कितनी नाकामी के बाद  तूने ये फोन मिलाया डूबते सूरज के प्रकाश में अब क्यों तुझे मैं याद आया एक सवाल बिना पूछे जवाब लाया तेरी सिसकियों में खुद को निरुत्तर पाया तू कोना चांद का वंचित है प्रकाश से मैं सागर हिलोरें ले रहा मात्र तेरे आभास से जाने भी दे सकते थे सब कुछ रहने भी दे सकते थे हम सब कुछ जो तय हुआ था  अठखेलियां करती  गेहूँ की बालियों में क्या इसने याद दिलाई मेरी या उन काँटो ने  जो दो दिन तक  ना निकले तेरे हाथों से या उन सरसों के फूलों ने जो आकर तेरी जुल्फों में अपने होने का आभास  कराते थे या मेरी उन बाहों ने जहां घंटो तुम सो  जाया करती थी या मेरे उन बालों ने  जिसमे तुमने कभी कंघी  नही करने दी या उस क्रिकेट बॉल ने जो मेरा नाक तोड़ गयी मैं दर्द में हंस र...

प्यार- एक यात्रा (2)

चाय सा है यह इश्क़ चाय सा है यह इश्क़, सुबह पहले पल से लेकर, शाम आखिरी पहर तक मुझे यह चाहिए। जैसे उसके ना मिलने से कमी खलती है वैसे ही तुम्हारे ना होने से सब अधुरा लगता है। जैसे ये उबलती है वैसे ही उबलते है मेरे जज़्बात, तुम्हें किसी ओर के साथ देखकर। इसके धुँए में उड़ते देखा है अक्सर अपनी ख्वाहिशों को मैंने। यह हर रंग में ढली है पर मुझे इसका थोड़ा हल्का सा गहरा रंग ही पसंद है। कभी कभी ये कड़क सी लगती है, तुम्हारे रवैए की तरह। कभी कभी चीनी सी मिठास जैसे मेरे लिए तुम्हारी परवाह तुम कहते हो क्या रखा इसमें ? एक खूबसूरत एहसास है जब तुम नहीं होते तब ये मेरे साथ होती हैं। शाम के बादलों के साथ,  सुबह में रोशनी के साथ, बारिश की हल्की बूंदो के साथ, ज़िन्दगी के तूफानों के साथ, रात के चांद के साथ। अंधेरे में तन्हा बैठकर चाय के साथ अनगिनत ख्वाब बुनने का मजा ही कुछ और होता है। इसकी तलब वैसी ही है जैसे कभी कभार तुम्हें देखने को दरवाजे से नजर टिकाए मेरी खामोश आंखे होती है। इसकी लत मुझे तुमसे भी ज्यादा थी क्योंकि तुम भी मेरे लिए इसी की तरह अज़ीज़ हो। पर अब तो 'शायद' 'शायद' कितना अच्छा श...

नदी, समुंद्र, चाँद और तुम

प्यार- एक यात्रा (1) नदी, समुंद्र, चाँद और तुम समुंद्र बहुत गहरा होता है, और शांत होता है। लेकिन नदियाँ चंचल होती है, कलकल करके बहती है और आकर समुंद्र में मिल जाती है। अब तो शायद समुंद्र को भी याद नहीं होगा कि कितनी नदियाँ उसमें समा चुकी है? कितना भाग्यशाली है ना समुंद्र की उस से इतनी नदियाँ प्यार करती है और उसे अपनी नियति बना लेती है। हर बाधा को पार करके पत्थरों को काटती जंगलों और बीहड़ से रास्ता बनाती हुई बिना रुके चलती ही जाती है अपने प्यार के रास्ते पर,  अपने प्यार से मिलने । लोग समंदर को बेवफा कहते है क्योंकि वो जाने कितनी नदियों से मिलता है, और वो उससे बिना शर्त प्यार करती है। जैसे मेरा प्यार है तुम्हारे लिए ओर तुम हो उस समन्दर की तरह पर कोई नहीं जानता कि वह उनसे प्यार करता भी या नहीं, जैसे मैं नहीं जानती कि तुम प्यार करते भी हो या नहीं पर फिर भी नदी की तरह चली आती हूँ तुम्हारे पास। लेकिन यहीं तो प्यार है शायद लेकिन समन्दर का क्या क्या सचमुच वो बेवफा है? पता नहीं पर वो खामोश हैं तुम्हारी तरह, या तुम खामोश रहते हो समंदर की तरह। समन्दर तो खामोश रहकर जाने कितने ही राज, कितनी ही ...